हटकेश्वर महादेव मंदिर के साथ जुड़ी है एक दिलचस्प कहानी,काशी की तरह यहां विशेष पूजा पाठ

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रायपुर 15 नवंबर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महादेव घाट पर हटकेश्वर महादेव का चमत्कारिक मंदिर है। खारुन नदी के तट पर स्थित महादेव मंदिर के पीछे त्रेता युग की एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। जिसके चलते यहां देशभर ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर खारुन नदी के तट पर होने की वजह से महादेव घाट के नाम से प्रसिद्ध है। रायपुर शहर से 8 किमी दूर स्थित कई वर्षो पुराना भगवान शिव का यह मंदिर प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।

आस्था के सैलाब में गोता लगाने के लिए श्रद्धालु महादेव घाट कार्तिक पुन्नी के दिन पहुंचते हैं। मान्यता है कि वर्षों से पुराने इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो जाती है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिरों में शुमार इस मंदिर में दर्शन करने के लिए देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। बारिक नक्काशी से सुसज्जित इस भव्य मंदिर की आंतरिक और बाहरी कक्षों की शोभा देखते ही बनती है। बताते हैं कि इस मंदिर के मुख्य आराध्य भगवान हटकेश्वर महादेव नागर ब्राह्मणों के संरक्षक देवता माने जाते हैं। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के पास ही रामजानकी, लक्ष्मण और बरहादेव की प्रतिमा है।

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हनुमानजी अपने कंधे पर शिवजी को लाये थे

भगवान हनुमान जी शिव जी को अपने कंधे पर यहां लेकर आए थे। इस कथा के चलते ही यह मंदिर दूर-दूर तक जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की मान्यता भगवान श्रीराम के वन गमन के समय हुई थी। वनवास के दौरान जब वे छत्तीसगढ़ के इस इलाके से गुजर रहे थे, तब इस शिवलिंग की स्थापना लक्ष्मणजी के हाथों हुई थी। कहा जाता है कि स्थापना के लिए हनुमानजी अपने कंधे पर शिवजी को लेकर निकल पड़े, बाद में ब्राह्मण देवता को आमंत्रण करने गए तब तक देर हो गई। इधर लक्ष्मणजी देरी होने से क्रोधित हो रहे थे, क्योंकि स्थापना के समय में देर हो गई थी। जहां स्थापना की योजना बनाई थी, वहां न करके स्थापना के समय को देखते हुए खारुन नदी के तट पर ही स्थापना की।

पिंडदान का विशेष पूजन

खारुन नदी के बीचों-बीच जाकर यहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान भी किया जाता है। गया और काशी की तरह यहां विशेष पूजा पाठ भी किया जाता है।

कार्तिक-पूर्णिमा पर लगता है मेला

रायपुर शहर की प्रारंभिक बसाहट खारुन नदी के तट पर स्थित महादेव घाट क्षेत्र में हुई थी। रायपुर के कलचुरी राजाओं ने सर्वप्रथम इस क्षेत्र में अपनी राजधानी बनाई थी। राजा ब्रह्मदेव के शिलालेखों से ज्ञात होता है कि हाजीराज ने यहां हटकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया था। वर्तमान में खारुन नदी के तट के आस-पास अनेक छोटे-बड़े मंदिर बन गए हैं। लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हटकेश्वर महादेव का मंदिर है। यह मंदिर बाहर से आधुनिक प्रतीत होता है, किंतु संपूर्ण संरचना को देखने से इसके उत्तर-मध्यकालीन होने का अनुमान किया जा सकता है। यहां कार्तिक-पूर्णिमा के समय एक बड़ा मेला लगता है।

रिपोर्टर - करन साहू (पाटन के गोठ)
रिपोर्टर - करन साहू (पाटन के गोठ)
करन साहू रिपोर्टर - पाटन "के गोठ (PKG NEWS) Powerd By "Chhattisgarh 24 News" Group Of multimedia Pvt. Ltd.

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