कुम्हारी 26 अक्टूबर : स्व. बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय कुम्हारी जिला दुर्ग (छ.ग.) में जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत (ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्रमुख प्राचार्य डॉ.अमृता कस्तूरे ने किया। उन्होंने स्वागत उद्बोधन में बच्चो को जनजाति समुदाय के सांस्कृतिक जीवन शैली के बारे में जानकारी दी। बस्तर के आराध्य देवी मां दंतेश्वरी से जुड़ी वहां के जनजातियों के सांस्कृतिक विरासत के बारे में छात्रों को अवगत कराया। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कहा कि आज की युवा पीढ़ी उन सब पारंपरिक रीति-रिवाज से दूर होते जा रहे हैं। हमें बहुत कुछ इस जनजाति समाज से सीखने की जरूरत है।
कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. अमृता पाठक ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया। मुख्य वक्ता श्रीमती संगीता चौबे, सामाजिक कार्यकर्ता, वनवासी आश्रम समिति रायपुर (छ. ग.) ने जनजाति जाननायकों के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान जिनके बारे में इतिहास के पन्नों में पढ़ने को प्राय: नहीं मिलता है। ऐसे जननायकों की गौरव गाथा के बारे में संक्षिप्त व्याख्यान प्रस्तुत किया । जिसमें वीरांगना रानी दुर्गावती ने मुगल शासको के सामने ना झुकते हुए वीरता पूर्वक उनसे संघर्ष किया । ठीक ऐसे ही बिरसा मुंडा से भगवान बिरसा मुंडा की उपाधि कैसे मिली इस पर उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा जी ने दीन-दुखियों की सेवा की तथा जब इन मुंडा जनजातियों को असभ्य, अशिक्षित कहकर उन पर अंग्रेजों ने अनेक अत्याचार, शोषण व दमनकारी नीति अपनाई तब बिरसा मुंडा ने सभी को एकजुट कर अंग्रेजों के विरुद्ध जंग छेड़ दी और अंग्रेजों को दांतों तले चने चबाने पर मजबूर कर दिया। एक समय ऐसा भी था कि जब अंग्रेज बिरसा मुंडा से खौफ खाते थे।
अन्ततः अंग्रेजों के बंदूकों का सामना कब तक धनुष बाण जैसे परंपरागत हथियार से लोहा ले पाते l बिरसा मुंडा को अंग्रेजों ने पकड़ लिया और जेल में डाल दिया जहां कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। आज के परिप्रेक्ष्य में जनजाति समाज के जीवन शैली पर भी संक्षेप में समझाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम के संयोजक मुकेश कुमार ने जनजाति समाज के गौरवशाली अतीत विषय पर कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने कहा कि 5 अक्टूबर को रानी दुर्गावती की 500 वी जयंती तथा आने वाले 14 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की 150 वी जयंती मनाया जाएगा। इस बीच के समय को जनजाति गौरव सप्ताह घोषित किया गया है। जिसमें उन जनजाति जननायकों की वीरगाथा को बताना जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, समाज सुधार में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। छात्र-छात्राओं को उनसे परीचित करना इसी तारतम में विविध कार्यक्रम जैसे- पोस्टर, निबंध, सूअर नृत्य, जनजाति संस्कृति पर आधारित आभूषणों, जनजाति नायकों की प्रदर्शनी, अवम प्रतियोगिता में भाग लिए छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र का विवरण किया गया। आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर इस समय पूरा देश अमृत महोत्सव मना रहा है l जिसका ध्येय वाक्य सबका साथ सबका विकास है l जिसमें सब की भूमिका महत्वपूर्ण है अगले 25 वर्षों में भारत को विकसित भारत @2047 बनाने का मांन. प्रधानमंत्री जी की सोच है। उसी के दिशा निर्देशनुसार यह कार्यक्रम आयोजित किया गया कार्यक्रम का संचालन डॉ. मौसमी रॉयचौधरी ने किया।
इस कार्यक्रम में डॉ. कावेरी जायसवाल, डॉ. पदमा सोमनाथे श्रीमती मालती पैकरा, श्रीमती एन. जयश्री, श्रीमती श्वेता दवे, कु. नेहा, कु. अर्चना उराव, डॉ. आरती वर्मा, डॉ. रानीपुष्पा बघेल, श्री जगमोहन नागवंशी, त्रिलोक यादव, टिकेश्वरी एवं समस्त छात्र छात्राएं उपस्थित थेl



