खुद जियो-औरो को भी जीने दो (लेख -राजेंद्र मार्कण्डेय)

खुद जियो-औरो को भी जीने दो (लेख-रचना – राजेंद्र मार्कण्डेय शिक्षादूत)

नवरात्रि का आज अष्टमी तिथि था। दूर गांव में परिचित मित्र के घर जवारा नेवता मिला था। पर व्यस्तता वश जा नहीं पाया था। तो सोचा आज जाकर श्रीफल भेंट कर आ जाता हूं।
मौसम को देखते हुए मित्र के घर दोपहर के पहले पहुंच गया।घर में भक्ति पूर्ण माहौल था। पूजा कक्ष में श्रीफल भेंटकर मित्र के साथ बैठा था। साउंड सिस्टम में भी भक्तिमय गीत चल रहा था…
पंखिड़ा तु उड़ी जाना पावागढ़ रे,
महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे।
इस सुंदर गीत के बीच बकरा के करूण आवाज ने हमारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मानों कह रहा हो- “मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है, मुझे छोड़ दो”
बकरा को देखते हुए मित्र ने बताया कि निमंत्रण बहुत सारे लोगों को दिए हैं।जिसके लिए ऐसे दो और बकरे को खरिद कर रखें हैं।कल जवारा विसर्जन के समय बली चढ़ाएंगे।आप भी खाकर जाना।
बकरा के करूण आवाज के बीच महात्मा गांधी के संबंध में सुनी हुई बात आज याद आ गया…बिहार के चंपारण में जब लोग बकरे को देवी को बलि चढ़ाने ले जा रहा थे, तो उस बकरे को बचाने के लिए गांधीजी का तर्क था, कि देवी को श्रेष्ठ बलि देना चाहिए। और मानव से श्रेष्ठ कुछ नहीं हो सकता। इसलिए बकरे के बदले मुझे ले चलो,बलि दे देना।
वह अहिंसा के पुजारी महात्मा थे, पर मेरे में इतना हिम्मत नहीं था, कि मित्र को इस तरह से बोल पाता,जिससे वह नाराज़ हो जाए।
मैंने मांसाहारी भोजन नहीं करने तथा और भी न्यौता दिए लोगों के घर जाने की अपनी व्यस्तताओं का हवाला देकर वहां से निकल गया।
कुछ जगहों पर अलग-अलग धर्मावलंबियों के द्वारा अलग-अलग समय में बलि के नाम पर इस तरह के जीवों को चढ़ावे के रूप में कत्ल करके प्रसाद के रूप में परोसा जाता हैं।
रास्ते में मेरा ध्यान उस निरीह बकरे के तरफ था।कि उसे बचाने के लिए मैं कुछ नहीं कर पाया।लोग बताते हैं कि बहुत पहले बलि के रूप में इंसान का भी वध कर देते थे।पर कुछ महापुरुषों और लोगों में आई जागृता के कारण अब इंसान की बली देने पर रोक लगी है।और कहीं -कहीं तो जीव बलि के बदले फल-फूल काटकर भी देवी को मनाने का चलन शुरू हो चुका हैं।
मेरे जुबान पर वह गरबा गीत चल रहा था… पंखिड़ा ओ पंखिड़ा…
इस बीच अपने गांव के सरहद पर दोनों तरफ मैदान के बीच सड़क पर छाता ओढ़े बैठा एक व्यक्ति को देखा। कंधे पर बड़ा सा थैला लिया हुआ था। कुछ दिनों पहले ही बच्चा चोर कि बात सुना था।
मैं अपनी गाड़ी रोककर उसकी ओर जाने लगा, तो देखा कि वह आगे की ओर दौड़ रहा है। और फिर एक चिड़िया को पकड़ कर जाल से निकाल रहा है।
मैंने सोचा शायद चिड़िया को बचा रहा है।पर यह क्या वह तो उस चिड़िया के पंख को उखाड़ कर,उसके गर्दन को मरोड़ रहा था। मैं बकरे को नहीं बचा पाने के पश्चाताप से निकलने के लिए इस चिड़िया को बचाने का संकल्प लिया। मैं उस चिड़िया के बदले पैसे देने की विनती किया।पर उन्होंने अपने पत्नी को जवारा विसर्जन पर बकरा भात के बदले चिड़िया का भोग लगाने की ज़िद पर अड़ गया। और मुझे वह चिड़िया किसी भी कीमत पर नहीं दिया।
इस बीच उस चिड़िया का दूसरा जोड़ा कुछ दूर जाकर यह सब देख रहा था। जिसे देखकर लग रहा,मानों कह रही हो ,कि हमने तुम इंसानों का क्या बिगाड़ा है, जो अपने स्वाद के लिए हम निरीह जीव – जन्तुओं का विनाश करने तुले हो।हम तो तुम्हारे हिस्से का दाना भी नहीं खाते, बल्कि घांस-फूस के बीजों पर जीते हैं।इस तरह से दूसरों को तकलीफ देकर,तुम इंसान भला कैसे खुश रह सकते हों।
जिसे बच्चा चोर समझा था वह चिड़ीमार निकला।
चिड़िमार चिड़िया को लेकर घर गया, तो यह क्या!घर के सामने लोगों की भीड़ लगी हुई थी। और अपने पत्नी को बेसुध लेटी देखकर चिड़ीमार के हाथ पैर कांपने लगे। लोगों ने जानकारी दी कि कुछ देर पहले अचानक सिने में दर्द की बात करके बेसुध गिर गई हैं।
लोगों ने कहा – चिड़ीमार के पत्नी की चिड़िया उड़ गई हैं।अपनी पत्नी को मरे हुए देखकर चिड़ीमार को अपने कृत्य और थैला में बंद चिड़िया के तरफ गया। चिड़िया मर चुकी थी।
शायद घर आते हुए रास्ते में जिस समय चिड़िया फड़फड़ाई थी,उसी समय उसके भी प्राण निकल गए थे। और चिड़ीमार के पत्नी का भी।
पश्चाताप के अथाह पीड़ा के साथ ,कि अपने कर्म का पूरा हिसाब देवी ने आज उसे दिया था।कि दूसरे के जोड़ी छुड़ाने के पाप की सजा मिली थी।
अपने पत्नी के साथ चिड़िया का भी दाह-संस्कार किया।और संकल्प लिया कि आज के बाद कभी चिड़िया नहीं मारूंगा और ना ही कभी मांसाहार करूंगा।
रात में दो जीवों के जान नहीं बचा पाने के पश्चाताप और थकान में कब नींद लगी,पता ही नहीं चला। इतना जरूर याद है कि दूकालुराम राम यादव के गीत माइक पर घर से ही सुनाई दे रही थी…
तोला मोला सब ला जाना है,
पर जाएं के तो दस बहाना है।
सुबह नींद खुली तो मेरी अर्धांगिनी सकोरे में पानी और चावल के दाने डाल रही थी।जिसे कुछ चिड़िया आकर खा-पी रही थी। और चहचहा रही थी,मानो धन्यवाद के साथ कह रही हो… “खुद जियो – औरों को भी जिने दो।”
आज शुभ दिन था कि सुबह-सुबह चिड़िया को दाना- पानी देते हुए घर में एक करूणामयी देवी का और दूसरी जवारा विसर्जन को जाती हुई ममतामई देवी दर्शन का सौभाग्य मिला था।

बच्चों के भविष्य के प्रति पालक चिंतित, सुधार हेतु शा.प्रा.शा. कौही में 10 बिन्दुओं पर चर्चा

रानीतराई। शासकीय प्राथमिक शाला कौही में शनिवार 3 अक्टूबर को आयोजित शाला प्रबंधन समिति के बैठक में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति चिंतित...

भिलाई : श्रमिक सभा ने 11 सूत्रीय मांग को लेकर सेल अध्यक्ष के नाम “सांसद विजय बघेल” को सौंपा ज्ञापन

दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल जी के निज निवास सेक्टर 5 भिलाई में श्रमिक सभा ने सेल अध्यक्षों के 11 सूत्रीय मांग पत्र सांसद...

ताज़ा खबरे

"छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़" के कंटेंट को कॉपी करना अपराध है। 

error: पाटन के गोठ (PKG NEWS) के न्यूज़ को कॉपी करना अपराध है