अब वो हाथ कहां
उंगली पकड़कर चलना सिखाएं,
निंद में भी खाना खिलाएं।
अब वो हाथ कहां।
कलम पकड़ कर लिखना सिखाएं,
खिलौने में चाबी भर जाएं।
अब वो हाथ कहां।
दर्द में मलहम लगाएं,
खाली जेब में पैसा दे जाएं,
अब वो हाथ कहां।
त्यौहार में पकवान बनाएं,
सफलता पर शाबाशी दे जाएं।
अब वो हाथ कहां।
गायों को जो घास खिलाएं,
खेतों में जो हल चलाएं।
अब वो हाथ कहां।
घर में झाड़ू-पोछा लगाएं,
गंदे कपड़े को चमकाएं।
अब वो हाथ कहां।
बूढ़ापे में लाठी बन जाएं,
कंधे का सहारा मिल जाएं।
अब वो हाथ कहां।
घरों में दीपक जलाएं,
जरूरत में जो साथ निभाएं।
अब वो हाथ कहां।
उंगलियों को ताकत बनाएं,
आंसू को मुस्कान बनाएं।
अब वो हाथ कहां।
ज्ञान और विज्ञान बताएं,
शोषित को जो न्याय दिलाएं।
अब वो हाथ कहां।
राष्ट्र निर्माण में ध्वज फहराएं,
मानवता को सम्मान दिलाएं।
अब वो हाथ कहां।
कवि – राजेन्द्र मारकण्डे (शिक्षादूत)


