* तरीघाट सरपंच को जनता ने दिया था भरपूर आशीर्वाद, अब ओछी राजनीति छोड़ विकास कार्यों पर दें ध्यान : अशोक साहू…
* विकास कार्य नहीं, सुविधा का अभाव; गांव के युवा चंदा जुटाकर कर रहे जनहित के काम — पंचायत की निष्क्रियता पर सवाल तो उठेंगे ही…
पाटन। ग्राम पंचायत तरीघाट में विकास कार्यों की रफ्तार थमने और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर अब पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। गांव में छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान नहीं होने से आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। इसी बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों को आपसी राजनीति से ऊपर उठकर गांव की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
गांव के पूर्व सरपंच अशोक साहू ने कहा कि वर्तमान सरपंच को जनता ने भरपूर आशीर्वाद देकर जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में अब उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर गांव और जनता के लिए समय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत का पहला दायित्व आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन वर्तमान में गांव की कई बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
गली-मोहल्लों की लाइट बंद, अंधेरे में ग्रामीण
अशोक साहू ने आरोप लगाया कि तरीघाट के कई गली-मोहल्लों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। चौक-चौराहों पर लगाए गए हाईमास्क भी बंद पड़े हैं, जिसके कारण रात में गांव के कई हिस्से अंधेरे में डूबे रहते हैं। ऐसे में पंचायत की प्राथमिकता आखिर क्या है, यह सवाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
नालियां बजबजा रहीं, बढ़ रहा मच्छरों का प्रकोप
गांव की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कई स्थानों पर नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी और बदबू की स्थिति बनी हुई है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए भी यदि लोगों को शिकायत करनी पड़े तो पंचायत की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नल-जल योजना अधूरी, ग्रामीणों को कब मिलेगा पूरा लाभ?
गांव में नल-जल योजना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही गई है। पूर्व सरपंच ने मांग की कि अधूरी पड़ी योजना को जल्द पूरा कराकर ग्रामीणों को नियमित पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मुक्तिधाम नहीं, हाईमास्क बंद और सुविधाएं अधूरी
तरीघाट में लंबे समय से सरकारी मुक्तिधाम की मांग उठती रही है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर गांव के प्रमुख स्थानों पर लगे हाईमास्क बंद पड़े हैं। ऐसे में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।
गांव में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े,
तरीघाट में पूर्व पंचायत पदाधिकारियों द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे ताकि गांव की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की दिक्कत ना हो,अब चोरी हारी की घटनाओं सहित बड़े घटना से कैसे बचेंगे
महिला कमांडो को काम करने से न रोकें,
अशोक साहू ने गांव में सेवा भाव से कार्य कर रही महिला कमांडो का भी समर्थन करते हुए कहा कि यदि महिलाएं स्वच्छता और जनहित के कार्यों में आगे आ रही हैं तो उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि अनावश्यक रूप से उनके काम में बाधा डाली जाए।
युवा आगे आए तो पंचायत की भूमिका पर सवाल
तरीघाट में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बीच गांव के युवाओं द्वारा चंदा एकत्र कर जनहित के कार्य किए जाने की स्थिति ने पंचायत व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब पंचायत के जिम्मे गांव की मूलभूत सुविधाओं का रखरखाव है, तब युवाओं को अपनी जेब और आपसी सहयोग से सार्वजनिक समस्याएं दूर करने के लिए आगे क्यों आना पड़ रहा है—यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच उठ रहा है।
बाजार शुल्क और टैक्स पर भी उठी आपत्ति
पूर्व सरपंच ने तरीघाट में बाजार शुल्क और विभिन्न चीजों पर लगाए जा रहे टैक्स को लेकर भी पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि पहले पंचायत को मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करनी चाहिए। गांव की गलियां, नालियां, रोशनी, पेयजल और सफाई व्यवस्था बदहाल हो और दूसरी ओर शुल्क व टैक्स का बोझ बढ़े, यह ग्रामीणों के हित में उचित नहीं है।
पंचायत में बाहरी लोगों के जमावड़े पर भी सवाल
पंचायत कार्यालय में बाहरी लोगों के जमावड़े को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत कार्यालय जनता की समस्याओं के समाधान का केंद्र होना चाहिए। वहां आने वाले लोगों और पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता रहना जरूरी है, ताकि आम ग्रामीणों को अपने ही काम के लिए भटकना न पड़े।
“गांव को विकास चाहिए, राजनीति नहीं”
अशोक साहू ने कहा कि तरीघाट विकास के मामले में करीब दस साल पीछे चला गया है। गांव को इस समय राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि विकास कार्यों की जरूरत है। उन्होंने सरपंच से अपील करते हुए कहा कि जनता ने भरोसा देकर जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए उस भरोसे का सम्मान करते हुए गांव को समय दें, गली-मोहल्लों की समस्याओं का तत्काल समाधान कराएं और पंचायत को सक्रिय बनाएं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इन आरोपों और उठाए गए सवालों पर पंचायत प्रतिनिधि क्या जवाब देते हैं और क्या तरीघाट की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाए जाते हैं।
अब जवाबदेही से नहीं बच सकती पंचायत
गांव की बदहाल सड़कों, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और हाईमास्क, बजबजाती नालियों, अधूरी नल-जल योजना, सफाई व्यवस्था की अनदेखी और मुक्तिधाम जैसी वर्षों पुरानी समस्याओं पर अब पंचायत को सिर्फ आश्वासन नहीं, जवाब देना होगा। जनता ने सरपंच को विकास और व्यवस्था सुधारने के लिए जनादेश दिया है, न कि आपसी राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप के लिए।
यदि पंचायत के रहते गांव के युवा चंदा जुटाकर सार्वजनिक समस्याएं दूर करने को मजबूर हैं, तो यह पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है। सरपंच को स्पष्ट करना चाहिए कि गांव की मूलभूत सुविधाएं कब तक दुरुस्त होंगी, बंद लाइटें कब जलेंगी, नालियों की सफाई कब होगी, नल-जल योजना कब शुरू होगी और मुक्तिधाम की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा? अब ग्रामीणों को बहाने नहीं, काम चाहिए और पंचायत को अपनी जिम्मेदारी का हिसाब देना होगा।


