
तहसीलदारों के तबादले से पाटन में राजस्व व्यवस्था फिर चरमराई
पवन ठाकुर के दुर्ग स्थानांतरण के बाद कल ही ममता टावरी को मिला था मुख्य तहसीलदार का प्रभार, अब नारायणपुर तबादला—राजस्व प्रकरणों का ढेर जस का तस

पाटन। तहसील कार्यालय पाटन में राजस्व मामलों के निराकरण को लेकर पहले से ही आम जनता की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही थीं, वहीं तहसीलदार पवन ठाकुर के दुर्ग स्थानांतरण के बाद अब एक और तबादले ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पवन ठाकुर के स्थानांतरण के बाद ममता टावरी को मुख्य तहसीलदार का प्रभार सौंपा गया था, लेकिन प्रभार संभालने के महज अगले ही दिन उनके नारायणपुर स्थानांतरण का आदेश सामने आने से तहसील कार्यालय में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है।

एक तरफ तहसील कार्यालय में राजस्व प्रकरणों का ढेर लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे स्थानांतरणों के कारण मामलों के निराकरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। जमीन संबंधी विवाद, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित विभिन्न राजस्व मामलों को लेकर ग्रामीण और पक्षकार पहले से ही कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
जनता पूछ रही—प्रकरणों का निराकरण कब होगा?
तहसीलदार का प्रभार बदलने से अब सबसे बड़ा सवाल उन लोगों के सामने है, जिनके राजस्व प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं। बार-बार अधिकारी बदलने से क्या लंबित मामलों की सुनवाई और निराकरण की प्रक्रिया और लंबी नहीं होगी? पवन ठाकुर के स्थानांतरण के बाद नई व्यवस्था संभल भी नहीं पाई थी कि ममता टावरी का तबादला हो गया। ऐसे में पाटन तहसील में राजस्व व्यवस्था को स्थायी नेतृत्व कब मिलेगा, यह सवाल अब आम जनता के बीच उठने लगा है।
बार-बार तबादले, बढ़ती परेशानी
राजस्व विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन लगातार बदलाव के बीच लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण की गति बनाए रखना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पाटन तहसील की जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी जाती है और लंबित मामलों के निराकरण के लिए प्रशासन क्या ठोस व्यवस्था करता है।




